झारखंड पेपर लीक में  67 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख वसूलने का आरोप, पूर्व चेयरमैन गिरफ्तार

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा और झारखंड लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा में सामने आए कथित्त फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले में आपराधिक अनुसंधान विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस मामले में जहां एक तरफ बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन और प्रश्न-पत्र लीक करने की पुष्टि हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और संवैधानिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर झारखंड के छात्रों ने सोमवार 10 अगस्त को रांची में जोरदार प्रदर्शन किया।

सीआईडी द्वारा गिरफ्तार अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से पूछताछ के बाद पेपर लीक और चयन में बड़े पैमाने पर हुई सांठगांठ का खुलासा हुआ है: आरोप है कि बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र और उत्तर उपलब्ध कराने के एवज में 12-12 लाख रुपये वसूले गए। इस प्रकार कुल 1.80 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन किया गया। अभ्यर्थियों को परीक्षा से ठीक पहले 65 प्रश्न और उनके उत्तर रटवाए गए थे।

पूछताछ में आरोपी अभय तिवारी (जो उस समय गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति अधिकारी के रूप में कार्यरत था) ने बताया कि उसने खुद सीजीएल परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की थी। इसके अलावा, उसका भाई अक्षय तिवारी (महिला एवं बाल विकास विभाग में जेएसए) और अक्षय की पत्नी सुष्मा कुमारी (सतर्कता विभाग) भी इसी परीक्षा के माध्यम से चयनित हुए थे।

परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक का काम करने वाली कंपनी ‘टीडीपीएल’ (जिसमें अभय तिवारी मार्केटिंग मैनेजर था) को रेट विवाद के कारण हटाया गया था। इसके बाद यह काम पटना के मिथिलेश सिंह की एजेंसी वेबेल को दिया गया, जिसे प्रश्न-पत्र छपाई और बायोमेट्रिक दोनों का जिम्मा मिला। अभय तिवारी ने मिथिलेश सिंह और खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक से संपर्क कर पेपर लीक कराया। बोकारो में प्रश्न-पत्र रटवाने के दौरान मिथिलेश सिंह और राकेश सिंह भी मौजूद थे।

इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड सीआईडी ने सोमवार को जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही इस पूरे केस में गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। उनकी यह गिरफ्तारी अभ्यर्थियों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच जेपीएससी के तीनों सदस्यों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई है।

परीक्षाओं में हुए करोड़ों रुपये के कथित अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के कोण को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले में अपनी जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। 

रांची में सोमवार, 10 अगस्त, को अभ्यर्थियों ने ‘विधानसभा घेराव’ आंदोलन शुरू किया। राज्य सरकार द्वारा 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और सुधार के आश्वासन के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े रहे। ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के बैनर तले राज्य भर से आए हजारों अभ्यर्थियों ने पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर पैदल मार्च निकाला, जिसमें कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता भी शामिल हुए।

इस बीच विधानसभा के पास छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई है। छात्र विधानसभा तक पहुंचना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें आखिरी चेतावनी देकर रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया और आंसूगैस के गोले छोड़े। पुलिस का आरोप है कि पुलिस वालों पर प्रदर्शनकारियों ने चप्पल और बोतलें फेंकी। बैरिकेड के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। छात्रों ने इसे “बर्बर” बताया है।

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने झारखंड में छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की निन्दा की है। राहुल ने एक्स पर लिखा- झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बलप्रयोग ग़लत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।

(तस्वीर : वीडियो ग्रैब)

(जनचौक ब्यूरो)

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